मुख्यमंत्री ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा सहित स्वास्थ्य जुड़े तीन योजनाओं का करेंगे आगाज

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मधुबनी

ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन जिले के 17 प्रखंडों में होगा संचालित

जिले में 17 पीएचसी को हब वहीं 36 एचएससी को स्पोक बनाया गया है

चिकित्सक देंगे मरीजों को निःशुल्क परामर्श

 

जिले में दूर दराज के ग्रामीण सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अब बेहतर व विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए सरकार द्वारा जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में हब एंड स्कोप प्रणाली से टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। यह सुविधा जिले के 17 प्रखंडों में संचालित किया जाएग की जाएगी। ई- टेलीमेडिसिन एक ऐसी सुविधा है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके सुदूर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती है। कोरोना जैसी महामारी में लोगों के लिए सच में यह हब संजीवनी का काम करेगी। सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 21 फरवरी को राज्य में ई-संजीवनी टेली‍मेडिसिन सहित स्वास्थ्य जुड़े तीन अन्य योजनाएं अश्विन पोर्टल, वंडर एप, एम्बुलेंस पोर्टल का भी आगाज करेंगे।

सामान्य बीमारियों का चिकित्सक देंगे निःशुल्क परामर्श:

जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया इस सुविधा के जरिये सामान्य बीमारियों जैसे सर्दी, बुखार, खांसी, सिर दर्द, पेट दर्द, त्वचा संबंधी बीमारी, संक्रामक रोग, शुगर, ब्लड प्रेशर, एवं कैंसर आदि के उपचार के लिए टेलीमेडिसिन के जरिये चिकित्सक व विशेषज्ञ से निःशुल्क परामर्श लिया जा सकता है। उन्होंने उन्होने उन्होंने बताया कि यदि मरीज के पास एंड्राइड एण्ड्रोइड-स्मार्ट फोन है तो वह ‘ई-संजीवनी ओपीडी एप’ को इंस्टाल करके या फिर ‘ई-संजीवनी डॉट इन’ पोर्टल पर जाकर सुविधा प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली पर संबंधित एएनएम एवं चिकित्सा पदाधिकारियों का प्रशिक्षण डेमो एप पर कराया गया है।

हब एंड स्कोप प्रणाली से काम करेगी टेली मेडिसिन सुविधा:

जिला अनुश्रवण उन्मूलन के पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया ई संजीवनी टेलीमेडिसिन क्रियान्वयन के तहत हब एवं स्पोक प्रणाली के रूप में कार्यरत होगा। जिसमें मरीज पहले एएनएम के पास कॉल करेंगे। फिर एएनएम मरीज की सभी जानकारी लेकर उसे डॉक्टर के पास फारर्वड करेंगी। जिसमें पाली बार विशेषज्ञ चिकित्सक टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीजों को सलाह देने के लिए उपलब्ध होंगे। इसके तहत चिकित्सकीय शिक्षा, प्रशिक्षण सऔर इसका प्रबंधन तक शामिल हैं| स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मरीज टेलीफोन पर ही चिकित्सा से संबंधित परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से मरीज चिकित्सकीय जानकारी भेज सकते हैं और वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के साथ हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर की मदद से रियल टाइम परिस्थितियों में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

रियल टाइम सहायता ले सकते हैं मरीज:

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब घर बैठे ही बेहतर व विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज करा सकेंगे। मरीजों को चिकित्सीय सुविधा देने के किए स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में यह एक ऐसी सुविधा है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके सुदूर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती है। इसके तहत चिकित्सकीय शिक्षा, प्रशिक्षण और इसका प्रबंधन तक शामिल हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मरीज चिकित्सकीय जानकारी भेज सकते हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से रियल टाइम परिस्थितियों में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

जिले के 17 प्रखंडों में ई संजीवनी टेलीमेडिसिन से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगी सुविधाएं:

सुनील कुमार ने बताया कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है।उप स्वास्थ्य केन्द्रों में ई संजीवनी टेलीमेडिसिन क्रियान्वयन के लिए एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि पीएचसी को हब व एचएससी में प्रणाली स्कोप के रूप में काम करेगी। जिले में 17 पीएचसी को हब बनाया गया है. वहीं 36 एचएससी को स्कोच बनाया गया है।एचएससी स्तर पर एएनएम मौजूद रहेंगी। जहां पर मरीज आकर अपनी समस्या को बतायेंगे। इसके बाद एएनएम मरीज की पूरी जानकारी (हिस्ट्री) लेकर ऑनलाइन पीएचसी में उपलब्ध चिकित्सक को कॉल करके मरीज से बात करायेंगी।पीएचसी में पाली बार विशेषज्ञ चिकित्सक टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीजों को सलाह देने के लिए उपलब्ध होंगे।

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shyam ji

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