मुख्यमंत्री द्वारा वंडर एप्प का किया गया शुभारंभ

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दरभंगा संवाददाता

छः जिले में वंडर एप्प एप्पलीकेशन आज से शुरू
1700 एसएचसी पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा शुरू
जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में दीदी की रसोई शुरू

 

बिहार की राजधानी पटना के संवाद भवन में स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के शुभारंभ कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री बिहार श्री नीतीश कुमार के कर कमलों से वंडर एप्प एप्लीकेशन का शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा फिलहाल इसे बिहार के 6 जिलों दरभंगा सहित गया, पटना, मुजफ्फरपुर, नालंदा एवं भागलपुर में लागू किया गया है।
आत्मनिर्भर बिहार सात निश्चय पार्ट 2 के अंतर्गत बिहार में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण हेतु निर्मित वंडर एप्लीकेशन के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए दरभंगा के जिलाधिकारी डॉ0 त्यागराजन एसएम को माननीय मुख्यमंत्री के कर कमलों से उनके प्रतिनिधि डॉ0 श्रद्धा झा को प्रशस्ति पत्र प्रदान देकर सम्मानित किया गया।
वंडर एप्प की सफलता के लिए केयर इंडिया के जिला समन्वयक डॉ श्रद्धा झा, राज्य स्वास्थ्य समिति के मातृत्व स्वास्थ्य सेवा की निगरानी एवं अनुश्रवण करने वाले डॉक्टर सरिता, डीएमसीएच के स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ कुमुदिनी झा को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया एवं इस एप्प को सरजमीं पर लाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करने वाली शिकागो निवासी डॉक्टर नर्मदा कुकुस्वामी को भी प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
इसके साथ ही इस अवसर पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा, अश्विन पोर्टल, एंबुलेंस ट्रैकिंग सिस्टम, जीविका संपोषित दीदी की रसोई का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री बिहार के कर कमलों से किया गया।
बिहार राज्य के 1700 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आज से
ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा शुरू कर दी गयी है। इस सेवा के अंतर्गत उन सभी 1700 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रत्येक सोमवार, गुरुवार एवं शनिवार को 9:00 बजे पूर्वाह्न से 2:00 बजे अपराह्न तक ई- संजीवनी टेलीमेडिसिन की सेवाएं वीडियो कॉलिंग के माध्यम से मरीजों को प्रदान की जाएगी। जहाँ मरीजों को 37 प्रकार की निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इस सेवा में मरीज की बीमारी की गंभीरता एवं जटिलता पाए जाने पर एंबुलेंस के साथ रेफरल सुविधा भी मुहैया कराई गई है।
जीविका संपोषित दीदी की रसोई राज्य के सभी जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में लागू किया गया है। जहाँ जीविका दीदियों द्वारा मरीजों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना को बाद में बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।
शुभारंभ कार्यक्रम को माननीय मुख्यमंत्री के अलावे बिहार के दोनों माननीय उपमुख्यमंत्री श्री तार किशोर प्रसाद एवं श्रीमती रेणु देवी, बिहार केमाननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव श्री प्रत्यय अमृत द्वारा संबोधित किया गया।
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक श्री मनोज कुमार द्वारा शुभारंभ किए जाने वाले स्वास्थ्य सेवाओं का पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई।
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री अरविंद चौधरी, माननीय मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार व श्री मनीष कुमार वर्मा एवं ग्रामीण विकास विभाग,बिहार के सचिव श्री बाला मुरूगन डी उपस्थित थे।
आज जिस वंडर एप्प का बिहार के छः जिले में शुभारंभ किया गया है और जिसे दरभंगा जिले में सफलतापूर्वक संचालित किया गया। जिससे हजारों गर्भवती महिलाओं को इससे लाभ प्राप्त हुआ। आइए हम जानते हैं क्या है वंडर ऐप?
वंडर एप्प गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी जांच की जाती है। भीएचएसएनडी दिवस पर आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की जांच होती है, प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। प्रत्येक सोमवार को कैंप लगाकर भी जांच की जाती है। उनका ब्लड प्रेशर, हिमोग्लोबिन, यूरिन एल्ब्यूमिन, वजन इत्यादि की जाँच की जाती है। और जांच के दौरान प्राप्त विस्तृत विवरण को वंडर एप्प पर अपलोड किया जाता है।
जांच में जिन गर्भवती महिला में हिमोग्लोबिन, आयरन या कोई अन्य कमी है, तो इसे वंडर एप्प पर अपलोड किया जाता है। थोड़ी कमी पायी जाती है उनको पीला बॉक्स में तथा जिनमे गभीर कमी पायी जाती है उन्हें लाल बॉक्स में रखा जाता है। इस प्रकार प्रत्येक गर्भवती महिला का केस हिस्ट्री वंडर एप्प के माध्यम से मिल जाता है और फिर सही इलाज ससमय किया जाता है।
साथ ही किस कमी के लिए कौन सी दवा दी जानी है, किस तरह इलाज किया जाना है। यह भी जानकारी एप्प के माध्यम से दी जाती है। जैसे खून की कमी के लिए आयरन फोलिक एसिड की गोली इत्यादि। गंभीर समस्या के मामले में रेड अलर्ट तथा हल्की समस्या के मामले में येलो अलर्ट चिकित्सक के मोबाइल पर आ जाता है।
यदि किसी गर्भवती महिला को कोई गंभीर समस्या है तो वंडर एप्प के माध्यम से रेफरल अस्पताल या डीएमसीएच रेफर किया जाता है। इसके पहले उसे उस मरीज का रिपोर्ट ऑनलाइन भेज दिया जाता है। इस प्रकार 40 सेकेंड के अंदर में सारी जानकारी रेफरल अस्पताल या डीएमसीएच को मिल जाता है, जिसके कारण उस महिला मरीज को बचाने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो जाता है। इससे पहले डॉक्टर को कई मामलों में पता नहीं रहता था कि आनेवाले मरीज का केस हिस्ट्री क्या है? लेकिन, वंडर एप्प के माध्यम से सबकी ट्रेसिंग तुरंत हो जाती है और गंभीर मरीज का प्राथमिकता आधारित इलाज शुरू हो जाता है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी या संबंधित डॉक्टर को पहले से पता रहता है कि आने वाली गर्भवती महिला कौन सी बीमारी से ग्रस्त है। इस प्रकार गर्भवती महिला का इलाज शुरू से अंत तक प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है। इस एप्प के कारण दवा की सुविधा, इलाज की सुविधा व एएनएम की सुविधा बेहतर हुई है।

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shyam ji

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