जागृत मिथिला के द्वारा बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन

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मधुबनी

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसरपर जागृत मिथिला के तत्वावधानमे वर्चुअल माध्यम से मैथिली के मुर्द्धन्य कवि डा.गंगेश गुंजन के अध्यक्षता में आयोजित बहुभाषी कविगोष्ठीमे अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व पर बात रखते हुए प्रसिद्ध बंगाली कवि तृष्णा बसाक ने कहा मातृभाषा मनुष्य के अस्तित्व के लिए बहुत ही मूल्यवान धरोहर है।बंगलादेश का निर्माण भाषा आन्दोलन के कारण हुआ।उन्होंने ढाका में बंगभाषी आन्दोलनकारी शहीदों को याद किया।जिनके यादमे बर्ष1999से यूनेस्को के द्वारा प्रतिबर्ष मातृभाषा दिवस मनया जाता है।उन्होंने नेपाल मे मैथिली आन्दोलन में शहीद रंजू झा का भी अपने भाषण में उल्लेख किया।उन्होने अपनी दो कविता का भी पाठ किया।उसके बाद गुजराती भाषा के महत्वपूर्ण कवि हर्षद त्रिवेदी ने गुजराती में कविता पाठ किया। मैथिली कवि और कार्यक्रम के संयोजक दिलीप कुमार झा ने कहा यदि आप किसी से उस भाषा में बात करते हैं जो उसने अपने विद्यालय में सीखा है तो वह उसके मस्तिष्क तक पहुँचता है । किन्तु यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में भाषा में बात करते हैं जो उसने अपनी माँ से सिखा है तो ओ उसके हृदय तलतक पहुँचता है। बिजयचन्द्रा(तेलगु ) तुहिनांसु रथ(उड़िया) रुमु न्यौपानी( नेपाली)शशिमणि शर्मा(असमी)चन्द्रकान्त मूरासिंह (कोकबड़ोक)डा..गंगेश गुंजन और दिलीप कुमार झा ने मैथिली भाषा में कविता पाठ किया। सभी कविता का हीन्दी वा अंग्रेजी अनुवाद भी प्रस्तुत किया गया। त्रिपुरा की जनजातीय भाषा कोकबड़ोक के कवि चन्द्रकान्त मूरासिंह का कविता पाठ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोकबड़ोक बोलने बालों की संख्या अब मात्र छ: लाख रह गया है।ऐसी भाषाओं के संरक्षण के लिए यह दिवस अन्यन्त महत्वपूर्ण है।

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shyam ji

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