संसार का सारा विष पी कर भी अमृत की रस-गंगा बहाते रहे निराला

संसार का सारा विष पी कर भी अमृत की रस-गंगा बहाते रहे निराला
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पटना

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन

हिन्दी काव्य में छायावाद काल के स्तुत्य स्तम्भ महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का सम्पूर्ण व्यक्तित्व निराला था। अपने समय के वे एक ऐसे कवि थे जो जीवन- पर्यन्त संसार का विष पीते रहे, पर विष वमन नहीं किया, अपितु अमृत की रस गंगा बहाई। अंतिम दिनों में उनकी पीड़ा भयानक कुँठा में बदल गई थी, जिससे वो विक्षिप्तावस्था में आ गए। ‘राम की शक्ति पूजा’ और ‘जूही की कली’ के महाकवि की उस दशा का कारण संसार कभी समझ न पाया और न ही समझने की चेष्टा की। संसार को स्वप्निल आनंद के सागर में बहा ले जाने वाला कवि स्वयं दर्द का पर्याय बना और कड़वी घूँट पीता हुआ, एक दिन संसार छोड़ चला गया। हमने उनके अनमोल मूल्य को जाना पर बहुत देर से। बच्चन जी ने कहा था कि “निराला जी ने अपना सारा अमृत हिन्दी काव्य में लुटा दिया है। अब उनके पास केवल विष ही बचा है, जो संसार ने उन्हें दिया है।”
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मंगलवार को आयोजित जयंती-समारोह एवं कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने यह बातें कही। डा सुलभ ने कहा कि निराला काव्य-महिमा से मंडित एक मनस्वी और स्वाभिमानी कवि थे। उनकी रचनाओं में जीवन के प्रति राग भी है और जन-मन की पीड़ा के स्वर भी। परंपरा और प्रगति का अद्भुत समन्वय उनमें दिखाई देता है।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ निराला जी की वाणी-वंदना से हुआ, जिसे डा शंकर प्रसाद ने वागेश्वरी राग ने स्वर दिया। वरिष्ठ कवि और सम्मेलन के उपाध्यक्ष मृत्युंजय मिश्र ‘करुणेश’ ने अपनी ग़ज़ल को स्वर देते हुए कहा “दूर जिनसे दूरदर्शन, दूर है आकाशवाणी, है उन्हीं के पास चलकर कुछ ग़ज़ल अपनी सुनानीl रो रहा है गाँव दुःख से कह रहा अपनी कहानी, अनसुनी आवाज़ सुख से सो रही है राजधानी।”
डा शंकर प्रसाद ने अपने दिल की बात यों कही कि “ज़िंदगी मैंने तेरे नाज़ उठाए हैं बहुत, पी लिया तेरे लिए फिर ज़हर का प्याला मैंने”। व्यंग्य के कवि ओम् प्रकाश पाण्डेय ने प्रश्न किया- “कहाँ किसी काया की छाया? कौन कहेगा? कहना, छाया कौन? काया कौन? कौन कहेगा ? कहना।”
कवि सुनील कुमार दूबे, डा मेहता नगेंद्र सिंह, कुमार अनुपम, राज कुमार प्रेमी, जय प्रकाश पुजारी, आनंद किशोर मिश्र, अशोक कुमार, डा उमा शंकर सिंह, डा रमेश पाठक, चितरंजन लाल भारती, अजय कुमार सिंह, पं बाल कृष्ण उपाध्याय, निशा पाराशर तथा नेहाल कुमार सिंह ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया।
अतिथियों का स्वागत सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा ने, मंच का संचालन साहित्यमंत्री डा भूपेन्द्र कलसी ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रबंधमंत्री कृष्णरंजन सिंह ने किया। इस अवसर पर डा नागेश्वर प्रसाद यादव, प्रणब कुमार समाजदार, रवींद्र कुमार सिंह, राम नरेश सिंह, अश्विनी कुमार कविराज, चंद्रशेखर आज़ाद, कुमारी मेनका समेत अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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shyam ji

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