डॉक्टरों की जासूसी करेगा प्राइबेट जासूसी एजेंसी

डॉक्टरों की जासूसी करेगा प्राइबेट जासूसी एजेंसी
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पटना

igms प्रशासन और सरकार डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस रोकने में विफल हो गया। सरकार अब प्राइवेट जांच एजेंसी की शरण में चली गयी है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के ऐसे डॉक्टर जो प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं उन पर सरकार अब तक कोई खास कार्रवाई करने में विफल हुई। संस्थान के 50 फ़ीसदी से अधिक डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। रोक के बाद भी डॉक्टर निजी क्लिनिक चलाते हैं फिर भी सरकार के स्तर से कोई एक्शन नही होता है साथ ही आईजीआईएमएस शासी समिति ने 15 दिन में निजी एजेंसी नियुक्त करने और एक माह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। बोर्ड ऑफ गवर्नर की बैठक में यह निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शासी समिति के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी का काम होगा कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त इकट्ठा करें और जानकारी दें कौन कौन डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं।
वही नॉन प्रैक्टिस अलाउंस का प्रावधान होने के बाद भी आईजीआईएमएस के पचास फीसद से अधिक डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक चलाते हैं या फिर दूसरे के अस्पतालों में सेवा देते हैं।IGIMS प्रशासन ने धावा दल का भी गठन किया हुआ है बावजूद सरकार का धावा दल सफेद कागज बनकर रह गया है। कई बार वैसे डॉक्टरों को पकड़ा भी गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। अब समिति ऐसे डॉक्टरों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है इसके लिए जांच एजेंसी नियुक्त किया है।हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब डॉक्टरो पर नकेल सरकार नहीं कर सकी तो फिर निजी एजेंसी कैसे कर पाएगी।

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shyam ji

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